शाहजहांपुर। पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई अब सिर्फ बारूद तक सीमित नहीं रही — इस बार यह सिंदूर के नाम पर संहार है। आतंकवाद के खिलाफ जारी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में देश की जांबाज बेटियां दुश्मन को उन्हीं की ज़ुबान में जवाब दे रही हैं। थल और नभ पर महिला अफसरों की मौजूदगी के बीच जल क्षेत्र से दुश्मन को खाक करने की जिम्मेदारी उठाई है शाहजहांपुर की बेटी ग्रुप कमांडर शुभांगी स्वरूप ने। वह टोही विमान उड़ाकर पाकिस्तान के विमानों की हलचल पर नजर रख रही हैं और कार्रवाई में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
पहलगाम में महिलाओं के सिंदूर को उजाड़ने वाली कायराना हरकत का जवाब भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को तबाह कर के दिया है। इसीलिए इस सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया यह सिर्फ जवाब नहीं, भारतीय नारी शक्ति का उग्र रूप है। इस अभियान की कमान महिला सैन्य अफसरों को सौंपी गई है, जो वायु, जल और थल तीनों मोर्चों पर मोर्चा संभाले हुए हैं।
सोफिया, व्योमिका के साथ अब शुभांगी भी चर्चा में
इस अभियान में थलसेना की कर्नल सोफिया कुरैशी और वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह अग्रिम पंक्ति में हैं, वहीं जलसेना से जुड़े समुद्री मोर्चे पर भारत की पहली महिला नौसेना पायलट ग्रुप कमांडर शुभांगी स्वरूप का नाम विशेष रूप से उभरकर सामने आया है। शाहजहांपुर के तिलहर कस्बे की रहने वाली शुभांगी इस वक्त पोर्ट ब्लेयर में ग्रुप कमांडर पद पर तैनात हैं और दुश्मन के विमानों की टोह लेने वाले डॉर्नियर टोही विमान को ऑपरेट कर रही हैं।
महिला शक्ति के पहले पंक्ति की योद्धा हैं शुभांगी
शुभांगी स्वरूप नौसेना की पहली महिला पायलट हैं। उन्होंने हैदराबाद स्थित एयरफोर्स एकेडमी से पायलट प्रशिक्षण लिया और देश के सबसे पहले महिला नौसेना पायलट बैच की सदस्य बनीं। बिहार की लेफ्टिनेंट शिवांगी और दिल्ली की लेफ्टिनेंट दिव्या शर्मा के साथ उन्होंने ‘ऑपरेशनल मैरीटाइम’ की डिग्री प्राप्त की और डॉर्नियर ऑपरेशनल फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी की। इसके बाद शुभांगी की तैनाती पोरबंदर, गोवा और विशाखापट्टनम में हुई थी।
सपने को उड़ान दी, प्रेरणा पाई पिता से
शुभांगी के पिता ज्ञान स्वरूप नेवी में कमांडर रह चुके हैं और वर्तमान में मुरादाबाद के सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी हैं। शुभांगी को सैन्य जीवन की प्रेरणा उन्हीं से मिली। डीएवी स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने के बाद शुभांगी ने बीटेक और फिर एमटेक किया, लेकिन एसएसबी परीक्षा पास कर देश सेवा के रास्ते को चुना। वह तायक्वांडो में राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता भी रह चुकी हैं।
भारत की सैन्य शक्ति में बेटियों की गर्जना
शुभांगी स्वरूप, शिवांगी सिंह और सोफिया-व्योमिका जैसी जांबाज बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि आज की भारतीय महिला सिर्फ घर की नहीं, देश की सीमाओं की भी रक्षा कर सकती है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इनका नेतृत्व महिला सशक्तिकरण का इतिहास रच रहा है।
Author: विकास यादव
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