बरेली। तहसील दिवस के मौके पर शनिवार को शेखूपुर मोहल्ला विवाद छाया रहा। नगर पालिका द्वारा जारी किए गए निर्माण हटाने के नोटिस के खिलाफ बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रशासन से इंसाफ की मांग की। लोगों ने पालिका की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण और तानाशाही करार दिया।
तालाब बताकर हटाने के निर्देश, लोगों का विरोध
शेखूपुर के निवासियों का कहना है कि गाटा संख्या 227 व 228 पर वर्षों से वे लोग रह रहे हैं, लेकिन नगर पालिका ने इसे तालाब की भूमि दिखाकर 25 जुलाई को नोटिस जारी कर दिया, जिसमें दर्जनों परिवारों को निर्माण हटाने का फरमान सुनाया गया। नागरिकों का आरोप है कि बिना सुनवाई और मौका दिए सीधे अवैध निर्माण घोषित कर उन्हें बेघर करने की कोशिश की जा रही है।
संयुक्त हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपा, कार्रवाई पर रोक की मांग
दर्जनों परिवारों ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपते हुए नगर पालिका की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि जब तक जांच पूरी न हो, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या बेदखली की कार्रवाई न की जाए।
वक्फ संपत्ति विवाद भी उभरा, धार्मिक स्थलों पर खतरे की आशंक
प्रकरण के दौरान एक और गंभीर मुद्दा उठा, जिसमें पुराने वक्फ विवाद को लेकर दस्तावेज सौंपे गए। आरोप लगाया गया कि गाटा संख्या 73 पर स्थित मस्जिद, मदरसा और ईदगाह को भी बेदखली की कार्रवाई में शामिल करने की कोशिश की जा रही है। निवासियों ने दावा किया कि दस्तावेजों में हेराफेरी कर वक्फ संपत्ति को विवादित दिखाया गया है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
निवासियों ने जिलाधिकारी बरेली समेत उच्च अधिकारियों से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि तहसील दिवस पर दिए गए ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।“बिना सुनवाई के हम पर जबरन कार्रवाई की जा रही है। हम सालों से यहां रह रहे हैं। प्रशासन हम गरीबों की भी सुने।” — एक स्थानीय निवासी
Author: विकास यादव
शहर के हर प्रमुख मुद्दों को लेकर हम बनेंगे आप की आवाज। छोटी और बड़ी खबरों को सबसे पहले आप तक पहुंचना Bareillypost कि प्राथमिकता है।आप हमसे जुड़कर ताजा खबरों को पढ़ते रहें,सबसे पहले।हमसे जुड़ने के लिए Bareillypost को सबस्क्राइब करें धन्यवाद।आप हमें 9997133166पर कोई भी खबर से संबंधित सूचना दे सकते हैं, धन्यवाद।




