बरेली। नशा मुक्त भारत अभियान के तहत ‘‘कर्मयोग, मद्य निषेध एवं विकसित भारत’’ विषय पर शनिवार को आई.वी.आर.आई. के स्वामी विवेकानंद सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण एवं सैनिक कल्याण विभाग तथा महानिदेशक उपाम एल. वेंकटेश्वर लू ने की।
उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि “नशा किसी भी रूप में नाश का कारण है।” उन्होंने कहा कि आज के समय में लोगों में संयम और मर्यादा की कमी होती जा रही है। मोबाइल और इंटरनेट की अंधी दौड़ में बच्चे अपने माता-पिता को कम आंक रहे हैं और गूगल को ही गुरु मान बैठे हैं। उन्होंने चेताया कि “आप जो देखना चाहते हैं, वही मोबाइल दिखाता है, आपके हित-अहित से उसका कोई सरोकार नहीं।”
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि समस्या कितनी भी बड़ी क्यों न हो, संवाद, चिंतन और मंथन ही उसका समाधान है। उन्होंने कर्मयोग का अर्थ समझाते हुए कहा कि “कर्मचारी वह है जो मेहनताना लेकर काम करता है, जबकि कर्मयोगी वह है जो वेतन से अधिक जिम्मेदारी निभाता है।”
उन्होंने कहा कि नशे से समाज का पतन होता है, इसलिए लोगों को इसके खिलाफ जागरूक करना हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासित जीवन और सकारात्मक सोच अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मण्डलायुक्त भूपेन्द्र एस. चौधरी ने कहा कि “नशा करने वाले व्यक्ति के प्रति किसी भी प्रकार का सम्मान मन में नहीं रखना चाहिए।” उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने आसपास के वातावरण को नशा मुक्त बनाने में योगदान दें।
कार्यक्रम में उप निदेशक समाज कल्याण अजय वीर, उप क्षेत्रीय मद्यनिषेध अधिकारी मनोज कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला दिव्यांगजन अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी नीतू कनौजिया, एनजीओ मानव संसाधन नशा उन्मूलन केंद्र सहित जिले के विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के प्राचार्य, अध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
Author: विकास यादव
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