मीना की दुनिया गुम, कागजों में सिमटा ‘मीना मंच’

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केवल नाम की योजना बनकर रह गया बालिका सशक्तिकरण कार्यक्रम

बरेली। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में छात्र उपस्थिति बढ़ाने को लेकर समय-समय पर अधिकारियों द्वारा निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। बार-बार के निर्देशों के बावजूद छात्र उपस्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।

इसी क्रम में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा ‘मीना मंच’ कार्यक्रम भी अब केवल नाम मात्र का रह गया है। विद्यालयों में इस योजना का विधिवत संचालन होता हुआ कम ही दिखाई देता है।

क्या है मीना मंच?

यूनिसेफ द्वारा विकसित काल्पनिक पात्र मीना 9 वर्ष की एक निडर, साहसी और उत्साही बालिका के रूप में प्रस्तुत की गई है। उसका जन्मदिन 24 सितंबर को मनाया जाता है। लड़कियों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने और उन्हें जागरूक बनाने के उद्देश्य से प्राथमिक विद्यालयों में मीना मंच का गठन किया गया था।

योजना के तहत विद्यालय की एक शिक्षिका को मीना मंच सुगमकर्ता नामित किया जाता है। शिक्षिका न होने की स्थिति में किसी सक्रिय पुरुष शिक्षक को यह दायित्व सौंपा जाता है। सुगमकर्ता का कार्य मीना मंच की गतिविधियों का संचालन, अभिलेखीकरण और समाज में आए बदलाव का विवरण तैयार करना होता है।

बैठकें भी कागजों तक सीमित?

जानकारों के अनुसार ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर मीना मंच सुगमकर्ताओं की त्रैमासिक बैठक आयोजित कर समीक्षा करने के आदेश भी हैं। इन बैठकों का उद्देश्य बालिका शिक्षा की वास्तविक स्थिति पर चर्चा कर आगामी तीन माह की कार्ययोजना तैयार करना होता है। हालांकि, जमीनी स्तर पर ऐसी बैठकों के आयोजन के स्पष्ट प्रमाण कम ही देखने को मिलते हैं। परिषदीय विद्यालयों में कभी-कभार कार्यक्रम आयोजित होने की बात जरूर सामने आती है, लेकिन नियमित और प्रभावी संचालन का अभाव साफ नजर आता है।

उद्देश्य और वास्तविकता में अंतर

मीना मंच का मूल उद्देश्य लड़कियों को आत्मविश्वासी, जागरूक और नेतृत्व क्षमता से संपन्न बनाना था। लेकिन यदि विद्यालयों में गतिविधियां नियमित रूप से संचालित ही नहीं हो रहीं, तो योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

बालिका शिक्षा के उत्थान के लिए बनाई गई यह पहल कहीं केवल कागजी औपचारिकता बनकर न रह जाए यह चिंता अब शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बनती जा रही है।…जाकिर हुसैन प्रधानाध्यापक, मॉडल प्राथमिक विद्यालय हरूनगला द्वितीय, बरेली।

विकास यादव
Author: विकास यादव

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