पुलिस जिसे तलाशती रही, वही आरोपी मुस्कुराते हुए पहुंचा अदालत कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
बरेली। राजेंद्र नगर स्थित कैफे में नर्सिंग छात्रा के दोस्तों के साथ मारपीट और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस को खुली चुनौती देने वाला मुख्य आरोपी, पूर्व बजरंग दल कार्यकर्ता ऋषभ ठाकुर आखिरकार हंसते हुए कोर्ट में सरेंडर करता नजर आया। जिस आरोपी की तलाश में पुलिस टीमों के लगे होने का दावा किया जा रहा था, उसका इस तरह बेखौफ अंदाज़ में अदालत पहुंचना बरेली पुलिस की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।सबसे बड़ा सवाल यही है क्या पुलिस सच में ऋषभ ठाकुर को गिरफ्तार करना चाहती थी?
कैफे में बर्थडे पार्टी, ‘लव जिहाद’ का आरोप और हिंसा
प्रेमनगर थाना क्षेत्र के राजेंद्र नगर स्थित ‘दि डेन कैफे एंड रेस्टोरेंट’ में एक नर्सिंग छात्रा अपने दोस्तों के साथ बर्थडे पार्टी मना रही थी। पार्टी में मुस्लिम युवकों की मौजूदगी की सूचना पर बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा, मारपीट और तोड़फोड़ की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रेस्टोरेंट में अफरा-तफरी मच गई, महंगे सामान तोड़े गए और कर्मचारियों के साथ भी बदसलूकी की गई।
पहले पीड़ितों पर चालान, बाद में बदला रुख
सूचना पर पहुंची प्रेमनगर पुलिस ने शुरुआत में शान, वाकिफ और कैफे कर्मचारी के खिलाफ शांति भंग में कार्रवाई की। हालांकि, जब एक युवक के फरार होने की जानकारी सीओ प्रथम आशुतोष शिवम को हुई तो उन्होंने इंस्पेक्टर को फटकार लगाई। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई का रुख बदला। कैफे संचालक शैलेंद्र गंगवार की तहरीर पर ऋषभ ठाकुर, दीपक पाठक समेत 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
वीडियो वायरल, नारेबाजी और खुलेआम गुंडागर्दी
इस पूरे घटनाक्रम के कई वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें बजरंग दल के कार्यकर्ता खुलेआम नारेबाजी, मारपीट और तोड़फोड़ करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के दौरान वायरल वीडियो को भी साक्ष्य के रूप में देखा जाएगा।
धमकी भरी रील, फिर भी गिरफ्तारी नहीं!
घटना के बाद ऋषभ ठाकुर ने सोशल मीडिया पर एक रील पोस्ट की, जिसमें वह बरेली पुलिस को खुलेआम धमकाता नजर आया। इसके बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि पुलिस जल्द ही उसकी गिरफ्तारी करेगी। लेकिन हुआ उल्टा न कोई दबिश, न कोई गिरफ्तारी, आरोपी खुद हंसते हुए कोर्ट में सरेंडर करने पहुंच गया
थाना प्रभारी हटे, सवाल जस के तस
मामले में लापरवाही के आरोपों के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी प्रेमनगर निरीक्षक राजबली सिंह को रिजर्व पुलिस लाइन से संबद्ध किया गया। उनकी जगह निरीक्षक सुरेंद्र सिंह को प्रभारी निरीक्षक प्रेमनगर बनाया गया। लेकिन सवाल अब भी कायम हैं बड़े सवाल, जिनका जवाब जरूरी, क्या आरोपी को जानबूझकर गिरफ्तारी से बचने का मौका दिया गया? सोशल मीडिया पर धमकी देने वाले के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या कानून सभी के लिए समान है या नाम और संगठन देखकर कार्रवाई तय होती है? क्या बरेली पुलिस की कार्यशैली से गलत संदेश जा रहा है? कप्तान की पुलिस को खुली चुनौती देने वाला आरोपी अगर बेखौफ होकर कोर्ट पहुंच सकता है, तो यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख का सवाल है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि अदालत और पुलिस आगे क्या रुख अपनाती है सख्त कानून या फिर वही पुरानी ढिलाई?
Author: विकास यादव
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