बरेली। पतंगबाजी के शौक में इस्तेमाल होने वाला शीशा लेपित चाइनीज मांझा अब सिर्फ डोर नहीं, बल्कि खामोश जानलेवा हथियार बन चुका है। इसकी खतरनाक धार केवल शीशे या केमिकल से नहीं, बल्कि इसमें मिलाए जाने वाले धातु कणों और कुछ प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से और भी घातक हो जाती है।
जानकारों के मुताबिक, मांझे की मजबूती और काटने की क्षमता बढ़ाने के लिए इसे इस तरह तैयार किया जाता है कि नमी, हवा या समय का भी इस पर असर न पड़े। यही वजह है कि यह डोर एक बार तनने के बाद लंबे समय तक धार बनाए रखती है और इंसानी त्वचा, पक्षियों के पंख और यहां तक कि गर्दन तक को बेरहमी से काट देती है।
डोर नहीं, खुले आसमान में लटकती मौत
यही कारण है कि यह मांझा केवल पतंग उड़ाने तक सीमित नहीं रहता। सड़कों पर लटकता मांझा बाइक सवारों की गर्दन काट रहा है।बच्चों के हाथ-पैर गंभीर रूप से जख्मी हो रहे हैं।पक्षियों के पंख और गर्दन कटने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। शहर में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने चाइनीज मांझे को जनसुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बना दिया है।
प्रतिबंध के बावजूद बेखौफ कारोबार, फाइलों में ही सिमट कर रह गया कानून
चाइनीज मांझे पर कई साल पहले प्रतिबंध लग चुका है, लेकिन हकीकत यह है कि यह प्रतिबंध अब तक ज़मीन पर असरदार साबित नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, चाइनीज मांझा एक संगठित अवैध नेटवर्क के जरिए बाजार तक पहुंच रहा है। सस्ती कीमत और जबरदस्त धार के लालच में लोग इसे खरीद लेते हैं, जबकि इसके दुष्परिणाम जानलेवा साबित हो रहे हैं।
छापेमारी के बाद बदला ठिकाना, गोदामों से हो रही चोरी-छिपे बिक्री
शासन की सख्ती और पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई के बाद मांझा कारोबारी अब खुली दुकानों से हटकर गुप्त गोदामों और गलियों के जरिये पतंगबाजों को चोरी-छिपे सप्लाई कर रहे हैं। नायलॉन और शीशा लेपित डोर इतनी तेज होती है कि ओवरब्रिज से गुजरते बाइक सवार तक इसकी चपेट में आ चुके हैं।
इन इलाकों में अब भी जारी है अवैध बिक्री
शहर के कई इलाकों में चाइनीज मांझे की चोरी-छिपे बिक्री की शिकायतें लगातार मिल रही हैं मलूकपुर नाला, संदल खां की बजरिया, बिहारीपुर, जखीरा, सैदपुर हॉकिंस, बिहारमान नगला, आजमनगर, स्वालेनगर, मठ लक्ष्मीपुर, बादशाहनगर, सीबीगंज, खलीलपुर सहित अन्य क्षेत्र।बताया जा रहा है कि सार्वजनिक स्थानों से माल हटाकर इसे गुप्त ठिकानों में रखा गया है, जहां से चुनिंदा ग्राहकों को सप्लाई की जा रही है।
सवालों के घेरे में निगरानी तंत्र
बार-बार की कार्रवाई और दावों के बावजूद चाइनीज मांझे का कारोबार जारी रहना प्रशासनिक निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब तक इस अवैध नेटवर्क की जड़ तक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आसमान में उड़ती यह डोर यूं ही मौत का फंदा बनी रहेगी।
Author: विकास यादव
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