स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26: टॉप-10 में पहुंचने की जंग…पांच बड़ी चुनौतियां और उनसे निपटने का नगर निगम का प्लान

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अफसरों के दावे बनाम ज़मीनी हकीकत, जनता की भागीदारी बनी सबसे बड़ा हथियार

बरेली। स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 को लेकर बरेली नगर निगम ने कमर कस ली है। गलियों से लेकर मुख्य सड़कों, नालों, सार्वजनिक स्थलों और खाली प्लॉटों तक सफाई अभियान तेज कर दिया गया है। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य खुद फील्ड में उतरकर वार्डों का निरीक्षण कर रहे हैं। वजह साफ है-पिछली बार तीन से दस लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में बरेली ने देश में 20वीं रैंक हासिल कर 60 पायदान की छलांग लगाई थी और अब लक्ष्य टॉप-10 में जगह बनाने का है। लेकिन इस लक्ष्य के रास्ते में शहर के सामने पांच बड़ी चुनौतियां हैं, जिन पर यदि समय रहते काबू नहीं पाया गया तो रैंकिंग पर असर पड़ सकता है।

चुनौती नंबर 1: खोदी गई और ऊबड़-खाबड़ सड़कें

पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में बरेली की रैंकिंग बिगड़ने की सबसे बड़ी वजह सीवर और अन्य योजनाओं के तहत खोदी गई सड़कों की समय से मरम्मत न होना रही थी।

इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। सीएम ग्रिड योजना के तहत राजेंद्रनगर और डीडी पुरम में एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी सिर्फ 60 प्रतिशत काम पूरा हो सका है। श्यामगंज गल्ला बाजार में साहू गोपीनाथ से श्यामगंज चौराहे तक दस दिन पहले बिछाई गई पेयजल लाइन के बाद सड़क की मरम्मत नहीं हुई। उबड़-खाबड़ सड़कें न सिर्फ जाम बढ़ा रही हैं, बल्कि स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।

अफसरों का प्लान:

नगर निगम का दावा है कि निर्माण एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाकर सड़कों की मरम्मत जल्द कराई जाएगी, ताकि सर्वेक्षण से पहले शहर की तस्वीर सुधारी जा सके।

पब्लिक की बात:

स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों का कहना है कि काम शुरू होता है, लेकिन पूरा होने में महीनों लग जाते हैं। सड़क ठीक न होने से धूल, कीचड़ और गंदगी बनी रहती है।

 चुनौती नंबर 2: कूड़ा निस्तारण और पृथक्करण

डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में बरेली ने इस बार 100 प्रतिशत अंक हासिल किए, लेकिन गीले और सूखे कूड़े के पृथक्करण में शहर पिछड़ गया। कूड़ा पृथक्करण में 46 अंक की गिरावट दर्ज की गई। शहर में मौजूद 10 एमआरएफ सेंटर, जिनका उद्देश्य कचरे को प्रोसेस करना है, उनमें से अधिकतर बंद पड़े हैं। बाकरगंज और सराय तलफी जैसे इलाकों में वर्षों से जमा कचरे का निस्तारण अब तक पूरा नहीं हो सका।

अफसरों का प्लान:

नगर निगम का कहना है कि एमआरएफ सेंटरों को दोबारा चालू किया जाएगा और गीला-सूखा कूड़ा अलग करने पर सख्ती बढ़ेगी।

पब्लिक की बात:

लोगों का कहना है कि जब निगम खुद पृथक्करण की व्यवस्था पूरी तरह नहीं कर पा रहा, तो सिर्फ जनता पर जिम्मेदारी डालना ठीक नहीं।

 चुनौती नंबर 3: सार्वजनिक शौचालयों की बदहाल स्थिति

स्वच्छता रैंकिंग में सार्वजनिक शौचालयों की अहम भूमिका होती है, लेकिन यही बरेली की कमजोर कड़ी बनते दिख रहे हैं। नगर निगम के पे-एंड-यूज शौचालयों की हालत खराब है। गंदगी और रख-रखाव की कमी का मामला शासन की डीसीसीसी बैठक तक पहुंच चुका है।

नौ संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन में सुधार न होने पर एफआईआर की चेतावनी दी गई है।

अफसरों का प्लान:

प्रभारी स्वच्छ भारत मिशन राजीव कुमार राठी के अनुसार, सभी शौचालयों की नियमित सफाई और मॉनिटरिंग की जाएगी।

पब्लिक की बात:

महिलाओं और बुजुर्गों का कहना है कि शौचालयों की हालत ऐसी है कि इस्तेमाल करने से लोग कतराते हैं।

 चुनौती नंबर 4: खुले डलावघर और शहर की सुंदरता

हालांकि बरेली को गार्बेज फ्री सिटी में एक स्टार मिला है, लेकिन शहर में अब भी कई जगह खुले डलावघर बदसूरती का कारण बने हुए हैं।

डिवाइडरों, खाली प्लॉटों और सड़क किनारे कचरा दिखाई देता है। यह न सिर्फ सुंदरता बिगाड़ता है, बल्कि सर्वेक्षण में नकारात्मक असर डालता है।

अफसरों का प्लान:

खुले डलावघरों को हटाकर कचरा संग्रह के वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं।

पब्लिक की बात:

नागरिकों का कहना है कि जब तक नियमित निगरानी नहीं होगी, तब तक खुले में कचरा डालने की आदत नहीं बदलेगी।

 चुनौती नंबर 5: जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन

स्वच्छ सर्वेक्षण सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की सोच और व्यवहार भी अहम पैमाना है। इस बार पहली बार आईईसी टीम ने सभी वार्डों में जागरूकता कार्यक्रम किए। रात में स्वच्छता चौपाल, चौराहों पर कबाड़ से कलाकृतियां जैसे नवाचार किए गए।

अफसरों का प्लान:

नगर निगम “बरेली 311” ऐप के जरिए शिकायतों के त्वरित निस्तारण और नागरिक सहभागिता बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

पब्लिक की बात:

लोग मानते हैं कि अगर शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई हो, तो जनता खुद सफाई अभियान से जुड़ेगी।

 रैंकिंग में बरेली का सफर

2017 में 298वें स्थान से शुरू हुआ सफर 2024 में 20वें स्थान तक पहुंचा। इस बार बरेली को 12,500 में से 9,913 अंक मिले हैं।

विकास यादव
Author: विकास यादव

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