बरेली। बरेली मंडल के हजारों किसानों की मेहनत की कमाई की फसल कथित घोटाले में गायब होने के विरोध में शुरू हुआ अनिश्चितकालीन किसान सत्याग्रह आज अपने 23वें दिन में प्रवेश कर गया। यह शांतिपूर्ण, गांधीवादी और लोकतांत्रिक आंदोलन 17 जनवरी 2026 से शहर के गांधी पार्क, चौकी चौराहा स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष लगातार जारी है।
आंदोलन समिति के संयोजक डॉ. हरीश गंगवार ने बताया कि इस घोटाले में लगभग 4,000 से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं, जिनकी 10,000 क्विंटल से अधिक गेहूं और धान की फसल साजिश, लापरवाही और मिलीभगत के चलते गायब कर दी गई। यह फसल बजीरगंज (जनपद बदायूं) स्थित उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के गोदाम में जमा थी, जहां थाना प्रभारी एवं संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत से यह गंभीर घोटाला अंजाम दिया गया।
डॉ. गंगवार ने कहा कि किसानों को न केवल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, बल्कि वे मानसिक प्रताड़ना का भी शिकार हो रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से अब तक न तो दोषियों पर ठोस कार्रवाई हुई, न ही एसआईटी गठित कर उसमें किसान प्रतिनिधि को शामिल करने की मांग पर कोई निर्णय लिया गया है।
डबल इंजन सरकार पर बरसे किसान नेता
फरीदपुर से आए किसान नेता कमर गनी ने भाजपा की डबल इंजन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार एक ओर किसानों से बड़े-बड़े वादे करती है और दूसरी ओर उनके हक की अनदेखी कर बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचा रही है।
उन्होंने कहा, “आज देश का अन्नदाता किसान सड़कों पर ठोकरें खा रहा है। यह बेहद शर्मनाक है कि किसान अपनी जायज मांगों के लिए धरना दे रहा है और सरकार चुप्पी साधे बैठी है।”
प्रशासन की बेरुखी पर उठे सवाल
बरेली कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. अलाउद्दीन खान ने कहा कि यह आंदोलन सत्य और अहिंसा की ताकत पर आधारित है। किसानों का संकल्प अटल है और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने आंदोलन की प्रमुख मांगें दोहराते हुए कहा, दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई, किसानों को फसल का पूरा मुआवजा, जांच समिति में किसान प्रतिनिधि की भागीदारी, प्रशासन की उदासीनता पर रोक
कांग्रेस का समर्थन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष चौधरी असलम मियां ने सत्याग्रह को समर्थन देते हुए कहा कि कांग्रेस संगठन पूरी मजबूती से किसानों के साथ खड़ा है।
उन्होंने प्रशासन से किसानों की पीड़ा सुनकर न्याय करने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ये रहे आंदोलन में मौजूद प्रमुख चेहरे
सत्याग्रह में प्रमुख रूप से प्रो. डॉ. चारू मल्होत्रा, उल्फत सिंह कठेरिया, जाहिद अली, विपिन पटेल, कमरुद्दीन सैफी, साहिव सिंह, पंडित राज शर्मा, मनोज घोष, जोया खान, डॉ. सरताज हुसैन, दिनेश कुमार, तीरथ मधुकर, इरसाद अली सहित बड़ी संख्या में किसान व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
किसानों ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई केवल फसल की नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और अधिकार की है। “सत्यमेव जयते, सत्य की विजय होकर रहेगी।”
Author: विकास यादव
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