एक मैसेज आया… और खुल गया फर्जी नंबर प्लेट का राज

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बरेली। शहर में फर्जी नंबर प्लेट लगाकर वाहन चलाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इज्जतनगर क्षेत्र के रहने वाले युवक की स्कूटी  के असली नबर का इस्तेमाल कर प्रेमनगर थाना क्षेत्र में एक अन्य व्यक्ति बेखौफ होकर सड़क पर फर्राटा भर रह था। मामला तब उजागर हुआ जब स्कूटी मालिक के मोबाइल फोन पर बार-बार ट्रैफिक चालान का मैसेज आने लगा। पीड़ित की शिकायत पर प्रेमनगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

इज्जतनगर थाना क्षेत्र के रहपुरा रोड निवासी अली मोहम्मद पुत्र शफीक अहमद ने प्रेमनगर थाना में दर्ज कराई एफआईआर में बताया कि यह अपनी जुपिटर स्कूटी संख्या यूपी 25 डीएन 6084 का पंजीकृत स्वामी है। अली मोहम्मद के अनुसार कुछ दिन पहले उनके मोबाइल फोन पर टेफिक विभाग की ओर में बालान कटने के मैसेज आने लगे। हैरानी की बात यह है कि जिस समय और जिस स्थान पर चालान कटने का जिक्र था, वहां उनकी स्कूटी मौजूद ही नहीं थी। पहले तो उन्होंने इसे तकनीकी गलती समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जय बार-बार चालान का मैसेज आने लगा, तब उन्हें किसी गड़बड़ी का शक हुआ

जांच में सामने आया फर्जी नंबर प्लेट का खेल

जब अली मोहम्मद ने मामले की पड़ताल की तो पता चला कि उनकी स्कूटी के नंबर की फर्जी प्लेअ बनवाकर कोई दूसरा व्यक्ति अपनी स्कूटी पर लगाकर चला रहा है। जांच में सामने आया कि इमरान उर्फ सीबी पुत्र अजमद खान, निवासी कुल्हाड़ापीर, फय्याज बिल्डिंग के पीछे, थाना प्रेमनगर, अपनी स्कूटी पर अली मोहम्मद की स्कूटी का नंबर लगाकर सड़कों पर घूम रहा है। फर्जी नंबर प्लेट के सहारे वह न केवल ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर रहा था, बल्कि हर चालान का वो इस असली मालिक पर पड़ रहा था। यह खुलासा होते हो अली मोहम्मद ने मामले को गंभीर मानते हुए बाना प्रेमनगर में तहरीर दी। पुलिस ने अली मोहम्मद की तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ फर्जी नंबर प्लेट लगाकर वाहन चलाने, धोखाधड़ी और कूटरचना में संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस अब आरोपी इमरान उर्फ सोपी की तलाश कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी नंबर एपेट कप जीर कहां से बनवाई गई।

फर्जी नंवर प्लेज में अपगधों की मिलता है संरक्षण

कानून विशेषतों के अनु‌सार फों नंबर प्लेट का इस्तेमाल एक गंभीर अपराध है। इसके जरिए अपराधी अपनी पहचान छिपाकर वारदात को अंजाम देते हैं। कई मामलों में लूट, झपटमारी, चैन स्नैचिंग और यहां तक कि गंभीर अपराधों में फर्जी नंबर प्लेट लगे वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह के मामलों में सबसे ज्यादा परेशानी असली वाहन मालिक को झेलनी पड़ती है, जिसे घार-बार पुलिस और अदालत के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई चार निदर्दोष व्यक्ति को अपनी बेगुनाही सावित करने में महीनों लग जाते हैं।

विकास यादव
Author: विकास यादव

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