भाईदूज क्यों मनाया जाता है..?

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भाईदूज (जिसे भाईया दूज या भाऊ बीज भी कहा जाता है) दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाने वाला एक पवित्र हिन्दू पर्व है। इसे “यम द्वितीया” भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों का तिलक करती हैं, उनका सम्मान करती हैं, और उनकी लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना के आवाहन पर उनके घर गए थे। यमुना ने अपने भाई का आदर-सत्कार किया, उन्हें तिलक लगाया, आरती की और भोजन कराया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो बहन इस दिन अपने भाई का तिलक करेगी, उसके भाई की आयु लम्बी होगी और उसे मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तब से यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है और बहन अपने भाई के लिए हमेशा खड़ी रहती है।

इस दिन का धार्मिक और सामाजिक महत्व भाई-बहन के संबंध को मजबूत करना है, जिसमें बहन अपने भाई की लंबी उम्र और भलाई की कामना करती है, और भाई अपने बहन की सुरक्षा का आश्वासन देता है। यह पर्व परिवार में प्रेम, विश्वास और एकता के भाव को जगाता है।

इस प्रकार, भाईदूज मनाने का मुख्य कारण भाई और बहन के बीच स्नेह, सुरक्षा, और दीर्घायु की कामना को प्रकट करना है

Bareilly Post
Author: Bareilly Post

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