बरेली: बरेली कॉलेज के अस्थायी कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है. कर्मचारी कल्याण सेवा समिति के नेतृत्व में कर्मचारियों ने उपश्रमायुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा. उपश्रमायुक्त के मौजूद न होने पर ज्ञापन डाक विभाग में रिसीव कराया गया. कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा है और कई मामलों में उनके साथ शोषण हो रहा है.
समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि इससे पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई थी. उनका आरोप है कि शिकायत का निस्तारण बिना जांच किए ही कर दिया गया और रिपोर्ट में यह दर्शा दिया गया कि कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है.
उन्होंने कहा कि बरेली कॉलेज में कई अस्थायी कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से कार्यरत हैं, लेकिन आज भी उन्हें करीब 20 हजार रुपये मासिक वेतन नहीं मिल पा रहा है. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संविदा कर्मियों को 20 हजार रुपये मासिक वेतन देने की बात कह चुके हैं, लेकिन इसका लाभ कर्मचारियों तक नहीं पहुंच रहा.
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कॉलेज में अस्थायी कर्मचारियों का शोषण और उत्पीड़न चरम पर है. समय पर वेतन नहीं दिया जाता और कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की.
जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि जल्द ही जिलाधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा जाएगा. साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभावित बरेली दौरे के दौरान एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलकर अपनी समस्याओं से अवगत कराने का समय मांगेगा.
समिति से जुड़े हरीश मौर्य ने कहा कि बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग भी लंबे समय से लंबित है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो जल्द आंदोलन शुरू किया जाएगा.
कर्मचारियों ने कॉलेज परिसर में पेयजल व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई. उनका कहना है कि मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे कर्मचारियों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है.
ज्ञापन देने वालों में रामपाल, दोदराम, तेजपाल, दामोदर, रामौतार, श्रीराम, राजाराम, पूरनलाल मसीह, संतोष कुमार सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे.













