मंत्री के भतीजे की गर्दन कटी तो जागा सिस्टम, क्या आम लोगों को भी मिलती ऐसी कार्रवाई?

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बरेली: गन्ना राज्यमंत्री संजय गंगवार के भतीजे की गर्दन चाइनीज मांझे से कटने के बाद पुलिस-प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है. हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ. आठ पुलों पर पुलिस तैनात कर दी गई. ड्रोन से निगरानी शुरू हो गई. अभियान भी चलाया जा रहा है. लेकिन इस कार्रवाई के बीच शहर में एक सवाल भी तेजी से उठ रहा है. अगर यही हादसा किसी आम या गरीब परिवार के बच्चे के साथ हुआ होता, तो क्या पुलिस इतनी ही तेजी और सख्ती से कार्रवाई करती?

दरअसल, बरेली में चाइनीज मांझे से घायल होने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं. कई बाइक सवार, राहगीर और पक्षी इसकी चपेट में आए हैं. मगर ऐसे मामलों में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने या पूरे शहर में विशेष अभियान चलने की घटनाएं कम ही देखने को मिली हैं.

इस बार घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति, चाइनीज मांझा बेचने वाले और पतंग उड़ाने वाले के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया. शहर के आठ प्रमुख पुलों पर दो-दो शिफ्ट में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए. ड्रोन से निगरानी शुरू हुई और पतंग उड़ाने वालों पर अभियान चलाया गया.

हालांकि, पुलिस का कहना है कि प्रतिबंधित चाइनीज मांझा जानलेवा है और इसी कारण सख्त कार्रवाई की जा रही है. लेकिन लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि क्या यही व्यवस्था हर पीड़ित को मिलती है?

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जब चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर पहले से प्रतिबंध है, तो यह शहर में पहुंच कैसे रहा है? यदि लगातार अभियान चल रहे हैं तो सप्लाई चेन पर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

अब लोगों की उम्मीद है कि यह सख्ती केवल एक मामले तक सीमित न रहे. चाहे पीड़ित मंत्री का परिजन हो या किसी गरीब परिवार का सदस्य, कानून का व्यवहार सभी के लिए एक जैसा होना चाहिए. अगर चाइनीज मांझा वास्तव में जानलेवा है, तो उसके निर्माण, बिक्री और उपयोग के खिलाफ हर मामले में समान और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. तभी ऐसे हादसों पर स्थायी रोक लग सकेगी.

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