बरेली। कालाजार जैसी जानलेवा बीमारी की रोकथाम और समय रहते पहचान सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार को बरेली के रेडिसन होटल में सात जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों की संयुक्त कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, संभल और रामपुर के स्वास्थ्य अधिकारियों को उत्तराखंड और नेपाल से आने वाले कालाजार के लक्षण वाले मरीजों की पहचान, जांच और उपचार को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का आयोजन पाथ संस्था की ओर से अपर निदेशक मलेरिया एवं वेक्टर बॉर्न डिजीज (वीबीडी) उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में किया गया। इसमें अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण बरेली मंडल भी मौजूद रहीं।
विशेषज्ञों ने बताया कि कालाजार (विसेरल लीशमैनियासिस) एक गंभीर परजीवी रोग है, जो लीशमैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है और सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।
कार्यशाला में बताया गया कि लंबे समय तक रहने वाला बुखार, तिल्ली और लीवर का बढ़ जाना, शरीर में खून की कमी, तेजी से वजन घटना और त्वचा का काला पड़ना इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे मरीजों की rK39 रैपिड टेस्ट, सीबीसी और अन्य आवश्यक जांच कर समय पर उपचार शुरू करने पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि कालाजार का इलाज केवल प्रशिक्षित चिकित्सकों की देखरेख में किया जाना चाहिए। इसके लिए लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी, मिल्टेफोसिन सहित अन्य प्रभावी दवाओं का उपयोग किया जाता है। मरीज को दवाओं का पूरा कोर्स पूरा करना जरूरी है, ताकि बीमारी दोबारा न उभरे।
बैठक में स्वास्थ्य अधिकारियों को बीमारी की रोकथाम के उपायों पर भी जागरूक किया गया। घरों में कीटनाशक छिड़काव, कीटनाशकयुक्त मच्छरदानी का इस्तेमाल, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने और घरों की दरारों व नमी वाले स्थानों की नियमित सफाई रखने की सलाह दी गई।
कार्यशाला में कालाजार के अलावा मलेरिया, डेंगू और फाइलेरिया की रोकथाम, समय पर पहचान और नियंत्रण रणनीति पर भी संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों से कहा गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों और बाहर से आने वाले संदिग्ध मरीजों पर विशेष निगरानी रखी जाए, ताकि संक्रमण फैलने से पहले ही प्रभावी कार्रवाई की जा सके














