एडीजी से डीजी, फिर कार्यवाहक और स्थायी डीजीपी तक का सफर, 1991 बैच के IPS राजीव कृष्ण ने कम समय में बनाई अलग पहचान
अमित शर्मा/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी ) राजीव कृष्ण ने अपने करियर में पदोन्नति की ऐसी रफ्तार दिखाई है, जो उन्हें पुलिस महकमे के चुनिंदा तेजतर्रार अधिकारियों की कतार में अलग पहचान देती है। 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को एक फरवरी 2024 को एडीजी पद से पदोन्नत कर पुलिस महानिदेशक (डीजी) बनाया गया था। इसके बाद 31 दिसंबर 2025 को उन्हें उत्तर प्रदेश का कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया। करीब पांच महीने बाद मई 2026 में उन्हें प्रदेश का स्थायी डीजीपी बना दिया गया। राजीव कृष्ण का यह सफर महज पदों की सीढ़ियां चढ़ने की कहानी नहीं, बल्कि लंबे प्रशासनिक और पुलिस अनुभव के भरोसे पर मिली जिम्मेदारियों का सिलसिला भी माना जा रहा है। एडीजी से डीजी और फिर प्रदेश के सर्वोच्च पुलिस पद तक पहुंचने के दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और अपराध नियंत्रण से जुड़े मोर्चों पर अपनी कार्यशैली की छाप छोड़ी। डीजीपी बनने के बाद उनके सामने प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने, अपराध पर प्रभावी नियंत्रण, पुलिसिंग में तकनीक के इस्तेमाल और आम लोगों में पुलिस के प्रति भरोसा कायम रखने की बड़ी चुनौती है। उनके कार्यकाल में पुलिस की जवाबदेही, शिकायतों के त्वरित निस्तारण और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिखाई देता है। राजीव कृष्ण के करियर की खास बात यह है कि जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ उनकी प्रशासनिक भूमिका भी तेजी से व्यापक होती गई। प्रमोशन की इस रफ्तार ने उन्हें यूपी पुलिस के ऐसे अधिकारियों में शामिल कर दिया है, जिनका करियर ग्राफ बेहद तेजी से ऊपर गया। यही रफ्तार और अनुभव अब प्रदेश की पुलिसिंग को दिशा देने में उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।














