बरेली। डॉक्टर बनने का सपना लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे एक छात्र की जिंदगी रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के बीच बिखर गई। श्रीराम मूर्ति मेडिकल कॉलेज में एमडी मेडिसिन प्रथम वर्ष के छात्र ने कथित तौर पर सीनियरों की प्रताड़ना से परेशान होकर तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। गंभीर रूप से घायल छात्र कई दिनों तक आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा। अब पीड़ित परिवार की शिकायत पर कई सीनियर डॉक्टरों और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया है।
मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम बने हुए हैं, लेकिन यह घटना कई सवाल खड़े कर रही है। क्या भविष्य के डॉक्टर तैयार करने वाले संस्थान अपने ही छात्रों को सुरक्षित माहौल नहीं दे पा रहे हैं? क्या शिकायतों को समय रहते गंभीरता से लिया जाता तो यह नौबत नहीं आती?
ड्यूटी के नाम पर मानसिक दबाव
बिजनौर के किरतपुर क्षेत्र के रहने वाले सुधीर पाराशर ने भोजीपुरा थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि उनके बेटे आशु पाराशर ने श्रीराम मूर्ति मेडिकल कॉलेज में एमडी मेडिसिन में दाखिला लिया था। दाखिले के बाद से ही कुछ सीनियर छात्र उसे लगातार परेशान करने लगे।
परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी के दौरान गाली-गलौज की जाती थी। अपमानजनक टिप्पणियां की जाती थीं। ड्यूटी खत्म होने के बाद भी घंटों तक रोका जाता था। कई बार निजी काम भी कराए जाते थे। धीरे-धीरे यह दबाव इतना बढ़ गया कि छात्र मानसिक रूप से टूटने लगा।
रविवार को भी नहीं मिलता था आराम
परिवार का कहना है कि सीनियर छात्र देर रात मोबाइल पर मैसेज भेजकर परेशान करते थे। छुट्टी और रविवार के दिन भी ड्यूटी पर बुला लिया जाता था। आरोप है कि पैरों में घाव होने के बावजूद उसे राहत नहीं दी गई। यहां तक कि कई बार लगातार 40-40 घंटे तक काम कराया गया।
पीड़ित परिवार का कहना है कि आशु ने अपनी परेशानी विभागाध्यक्ष तक पहुंचाई थी। उसे दूसरे डॉक्टर से मिलने की सलाह दी गई, लेकिन समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। शिकायतों पर कार्रवाई न होने से छात्र लगातार तनाव और अवसाद में चला गया।
फिर तीसरी मंजिल से लगा दी छलांग
परिजनों के मुताबिक 2 मई को आशु ने मेडिकल कॉलेज की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। घटना के बाद कॉलेज परिसर में हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक उसका इलाज चला।
घटना के बाद परिवार ने डॉ. रितेश गोयल, डॉ. कुशाग्र शर्मा, डॉ. मानस खंडेलवाल, डॉ. लतिका समेत अन्य लोगों और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।













