उलेमा पैनल की राय और प्रशासन से मंथन के बाद निर्णय, आज होगी आधिकारिक घोषणा
बरेली। दरगाह आला हजरत से जुड़ा सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन उर्स-ए-रज़वी अब तय कार्यक्रम से एक दिन पहले आयोजित होगा। पहले यह उर्स 7, 8 और 9 अगस्त को होना प्रस्तावित था, लेकिन 9 अगस्त को कांवड़ यात्रा और कुल शरीफ एक ही दिन पड़ने के कारण जायरीन की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इसकी तारीख बदलने का फैसला लिया गया है। अब उर्स 6, 7 और 8 अगस्त को आयोजित किए जाने की तैयारी है। इसकी आधिकारिक घोषणा कुछ ही घंटों में होने की संभावना है।
दरगाह प्रमुख हजरत सुब्हानी मियां और काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रजा खां कादरी की ओर से गठित उलेमा पैनल ने इस मसले पर इस्लामी दृष्टिकोण से अपनी राय लिखित रूप में बंद लिफाफे में सौंपी। इसके बाद दरगाह प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुई बैठक में तारीख परिवर्तन पर सहमति बन गई।
सूत्रों के अनुसार, जिला प्रशासन भी लंबे समय से उर्स की तिथि बदलने का अनुरोध कर रहा था। वजह यह थी कि 9 अगस्त को कांवड़ यात्रा अपने चरम पर रहेगी, वहीं उर्स का कुल शरीफ भी उसी दिन प्रस्तावित था। ऐसे में लाखों कांवड़ियों और देश-विदेश से आने वाले जायरीन की एक साथ मौजूदगी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती थी।
हर साल उर्स के अंतिम दिन दरगाह आला हजरत पर अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसी को देखते हुए दरगाह प्रबंधन, उलेमा और प्रशासन ने आपसी सहमति से ऐसा निर्णय लिया है, जिससे दोनों धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकें।
मीडिया प्रभारी ने की पुष्टि
दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि उर्स-ए-रज़वी पहले 7, 8 और 9 अगस्त को प्रस्तावित था। 9 अगस्त को कांवड़ जुलूस को देखते हुए जायरीन की सुरक्षा और सहूलियत के लिए दरगाह प्रमुख हजरत सुब्हानी मियां और काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद मियां द्वारा गठित उलेमा पैनल की राय तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक के बाद तिथि परिवर्तन का फैसला लिया गया है। इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द कर दी जाएगी।













