मां की उंगली थामकर स्कूल गया बेटा, आज देश के चुनिंदा पुलिस कप्तानों में शुमार

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मुख्यमंत्री का गौरव, डीजीपी का अभिमान,अनुराग आर्य ने बढ़ाया खाकी का मान

बरेली। गांव की मिट्टी से निकली प्रतिभा जब राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाती है, तो सबसे ज्यादा गर्व उस मां को होता है, जिसने बेटे की पहली पाठशाला बनकर उसे संस्कार और हौसला दिया। बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य की उपलब्धि भी ऐसी ही गौरवगाथा है। छपरौली की धरती से निकलकर पुलिस सेवा में अपनी कर्तव्यनिष्ठा, साहस और नेतृत्व क्षमता की मिसाल कायम करने वाले अनुराग आर्य का नाम देश के चुनिंदा पुलिस कप्तानों में शामिल हुआ है। उनकी इस उपलब्धि ने बरेली पुलिस का मान बढ़ाने के साथ ही मां डॉ. पूनम आर्य के लिए भी गर्व का ऐसा पल रचा है, जिसे शब्दों में समेटना आसान नहीं। आईपीएस अनुराग आर्य उन अधिकारियों में हैं, जिन्होंने वर्दी को महज जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनसेवा का संकल्प माना।कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, अपराध पर शिकंजा कसने और आमजन में पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ाने की उनकी कार्यशैली ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है।देश के चुनिंदा पुलिस कप्तानों में जिन अधिकारियों को जगह मिली है, उनमें जी. (एटा), केके बिश्नोई (संभल), प्राची सिंह (अंबेडकरनगर), डॉ. इराज राजा (गाजीपुर) और सर्वानंद टी. (अमेठी) के नाम भी शामिल हैं। मां के लिए बेटे की यह सफलता केवल किसी सूची में नाम आने भर की बात नहीं। यह उन अनगिनत त्यागों, दुआओं और संस्कारों की जीत है, जिनके सहारे एक साधारण परिवार का बेटा ऊंचाइयों तक पहुंचता है। जिस बेटे की उंगली पकड़कर कभी मां ने स्कूल की राह दिखाई होगी, आज वही बेटा पुलिस की वर्दी में देश और प्रदेश का गौरव बढ़ा रहा है।

छपरौली की मिट्टी से निकले अनुराग आर्य की कहानी यह संदेश देती है कि हुनर को संस्कार, मेहनत को मां की दुआ और कर्तव्य को जुनून मिल जाए तो कामयाबी की मंजिल दूर नहीं रहती।

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