डीएफओ दीक्षा भंडारी की पहल, शहरवासियों से ऐसे स्थानों की जानकारी देने की अपील; मियावाकी मॉडल से पहले ही बढ़ा चुकी हैं हरित क्षेत्र
बरेली। शहर में अगर कहीं पेड़ की जरूरत महसूस हो रही है या किसी कारण से पेड़ गिर गया है तो अब उस जगह को खाली नहीं छोड़ना पड़ेगा। वन विभाग ऐसे स्थानों पर पौधे लगाने की पहल करेगा। इसके लिए डीएफओ दीक्षा भंडारी ने शहरवासियों से ऐसे स्थानों की जानकारी वन विभाग को देने की अपील की है।
डीएफओ ने कहा कि शहर को हरा-भरा बनाने की जिम्मेदारी केवल वन विभाग की नहीं है। इसमें शहरवासियों की भागीदारी भी जरूरी है। लोगों को अपने आसपास ऐसे स्थानों की जानकारी देनी चाहिए, जहां पौधरोपण की जरूरत है। वन विभाग की टीम इन स्थानों का स्थलीय आकलन करेगी और जगह के अनुरूप उपयुक्त प्रजातियों के पौधे लगाने की दिशा में काम करेगी।
खाली जगहों पर फिर लौटेगी हरियाली
शहर में सड़क किनारे, पार्कों, सार्वजनिक स्थलों और अन्य स्थानों पर कई बार पेड़ गिरने के बाद उनकी जगह खाली रह जाती है। विभाग की इस पहल का मकसद ऐसी जगहों को दोबारा हरियाली से जोड़ना है। इससे शहर में हरित आवरण बढ़ाने के साथ लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से सीधे जोड़ा जा सकेगा।
मियावाकी मॉडल से घनी हरियाली पर जोर
डीएफओ दीक्षा भंडारी के करीब ढाई साल के कार्यकाल में बरेली में पारंपरिक पौधरोपण के साथ मियावाकी पद्धति को भी बढ़ावा दिया गया है। कम क्षेत्रफल में अधिक संख्या में पौधे लगाकर घना हरित क्षेत्र विकसित करने वाली इस पद्धति का इस्तेमाल शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए किया गया है। इससे शहर में पौधरोपण को केवल संख्या तक सीमित रखने के बजाय छोटे स्थानों को भी घनी हरियाली में बदलने पर जोर दिया गया है।
पर्यावरण मंत्री भी कर चुके हैं प्रयासों की सराहना
प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार भी पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में डीएफओ दीक्षा भंडारी के प्रयासों की सराहना कर चुके हैं। वन विभाग का कहना है कि शहर को अधिक हरा-भरा और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बनाने की यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी। पेड़ों की संख्या बढ़ने से शहर में छाया, बेहतर वायु गुणवत्ता और अनुकूल वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।














