KCC ऋण पर किसानों को बड़ी राहत: सांसद नीरज मौर्य के सवाल पर सरकार ने साफ किया नियम, जबरन बीमा बेचने वाले बैंकों पर होगी कार्रवाई

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बरेली। लोकसभा में बरेली के सांसद नीरज मौर्य ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण को लेकर किसानों की परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या किसानों को केसीसी ऋण लेने में सीआईबीआईएल स्कोर, नो-ड्यूज सर्टिफिकेट, ऋण नवीनीकरण में देरी, किसान ऋण पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों और फसल ऋण के साथ जबरन बीमा पॉलिसी थोपने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 28 जनवरी 2015 के दिशा-निर्देशों के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किसी भी ऋण के लिए नो-ड्यूज सर्टिफिकेट मांगने के लिए बाध्य नहीं हैं।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड सहित किसी भी ऋण के लिए न्यूनतम सीआईबीआईएल स्कोर अनिवार्य नहीं किया है। ऋण मंजूर करना संबंधित बैंक की नीति और नियामकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार होता है।

केसीसी ऋण के नवीनीकरण को लेकर सरकार ने बताया कि ऋण सीमा की समीक्षा किसान के भुगतान रिकॉर्ड और बैंक की नीति के आधार पर की जाती है। उत्तर प्रदेश की राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) ने बैंकों को समय पर केसीसी ऋण का नवीनीकरण करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार ने किसान ऋण पोर्टल (केआरपी) का भी बचाव किया। बताया कि सितंबर 2023 में शुरू हुए इस पोर्टल से आधार आधारित सत्यापन, ब्याज अनुदान और समय पर भुगतान करने वाले किसानों को मिलने वाले प्रोत्साहन का निस्तारण पहले से अधिक पारदर्शी और तेज हुआ है।

जबरन बीमा बेचने पर सख्त कार्रवाई

फसल ऋण के साथ जबरन बीमा या अन्य वित्तीय उत्पाद बेचने के मामले में भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले आरबीआई के संशोधित नियमों के तहत किसी भी वित्तीय उत्पाद की अनिवार्य बंडलिंग पर रोक रहेगी। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो बैंक को ग्राहक का पूरा पैसा लौटाने के साथ हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी।

सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि उनका उद्देश्य किसानों को बिना अनावश्यक बाधाओं के केसीसी ऋण दिलाना और बैंकिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है। सरकार के जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि बैंक मनमाने तरीके से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट नहीं मांग सकते और फसल ऋण के साथ जबरन बीमा भी नहीं बेच सकते।

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