एक हफ्ते की मोहलत… फिर होगी कार्रवाई, नाला सफाई पर महापौर का अल्टीमेटम

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बरेली: मानसून सिर पर है और शहर में जलभराव का खतरा भी बढ़ने लगा है. ऐसे में नगर निगम ने नाला सफाई अभियान को लेकर सख्त रुख अपना लिया है. महापौर डॉ. उमेश गौतम ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगले एक सप्ताह के भीतर सभी नालों की सफाई जमीन पर दिखनी चाहिए. यदि निरीक्षण के दौरान किसी क्षेत्र में नाले गंदगी, सिल्ट या कूड़े से भरे मिले तो संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) और सफाई निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

नगर निगम में हुई समीक्षा बैठक में महापौर ने स्वास्थ्य और निर्माण विभाग के अधिकारियों से क्षेत्रवार रिपोर्ट तलब की. उन्होंने कहा कि बरसात शुरू होने से पहले जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. सिर्फ फाइलों में सफाई दिखाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसका असर सड़कों और मोहल्लों में भी नजर आना चाहिए.

219 नालों की जिम्मेदारी, आधे का काम पूरा

नगर निगम के मुताबिक शहर में कुल 219 प्रमुख और सहायक नाले हैं. इनमें 187 नालों की सफाई का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग के पास है, जबकि 32 नालों की देखरेख निर्माण विभाग कर रहा है. सफाई कार्यों की निगरानी के लिए 8 सफाई निरीक्षक और 5 जूनियर इंजीनियर तैनात किए गए हैं.

अधिकारियों ने बैठक में दावा किया कि अब तक लगभग 50 प्रतिशत नालों की सफाई पूरी कर ली गई है. बाकी नालों में गाद निकालने और तली झाड़ सफाई का काम तेजी से चल रहा है. महापौर ने शेष कार्य निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए.

अगले सप्ताह होगा रियलिटी चेक

महापौर ने साफ कर दिया कि अब केवल रिपोर्ट के भरोसे काम नहीं चलेगा. अगले सप्ताह वह स्वयं नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारियों के साथ शहर के विभिन्न इलाकों का निरीक्षण करेंगे. जहां भी सफाई अधूरी मिली या लापरवाही सामने आई, वहां जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जाएगी.

नालों में कूड़ा फेंकने वालों पर भी सख्ती

बैठक में यह भी सामने आया कि सफाई के बाद कई जगह लोग फिर से नालों में कूड़ा, प्लास्टिक और निर्माण सामग्री डाल देते हैं. इससे नाले दोबारा चोक हो जाते हैं और बरसात में जलभराव की समस्या बढ़ जाती है.

महापौर ने ऐसे लोगों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. नगर निगम अब नालों में कूड़ा या मलबा डालने वालों के चालान करेगा. दोबारा उल्लंघन मिलने पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी.

डलावघर और ट्रंक लाइनें भी रडार पर

समीक्षा बैठक में डलावघरों और ट्रंक लाइनों की स्थिति पर भी चर्चा हुई. अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसी भी डलावघर पर कूड़े का अत्यधिक जमाव न होने पाए. साथ ही नालों के किनारे रखी निर्माण सामग्री और अन्य अवरोधों को हटाने की योजना भी बनाई जाए ताकि बरसात के दौरान पानी का बहाव प्रभावित न हो.

जलभराव मुक्त शहर का लक्ष्य

नगर निगम का दावा है कि मानसून शुरू होने से पहले सभी प्रमुख नालों की सफाई पूरी कर ली जाएगी. महापौर ने कहा कि बरसात के दौरान किसी भी क्षेत्र से जलभराव की शिकायत नहीं आनी चाहिए. इसके लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना होगा.

अब देखना यह होगा कि एक सप्ताह बाद होने वाले निरीक्षण में नाले सचमुच चमकते मिलते हैं या फिर कार्रवाई की गाज अधिकारियों पर गिरती है.

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