बरेली। श्री राममूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (श्री राममूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SRMS) एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। 2 जून 2026 को एमडी मेडिसिन प्रथम वर्ष के छात्र डॉ. आशु ने कथित तौर पर रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर) एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। 2 जून 2026 को एमडी मेडिसिन प्रथम वर्ष के छात्र डॉ. आशु ने कथित तौर पर रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर कॉलेज की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। गंभीर रूप से घायल छात्र ICU में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
घटना के बाद छात्र के पिता की तहरीर पर भोजीपुरा थाने में कॉलेज प्रशासन समेत चार डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक घटना है, या फिर उस खौफनाक सिलसिले की अगली कड़ी, जिसमें पिछले 16 वर्षों में 8 छात्रों की जान जा चुकी है?
हर मौत के बाद वही कहानी…
हर बार जांच हुई। हर बार कमेटियां बनीं। हर बार मौतों को अवसाद या आत्महत्या का मामला बताकर फाइल बंद कर दी गई। लेकिन किसी ने यह जानने की गंभीर कोशिश नहीं की कि आखिर एक ही संस्थान में बार-बार छात्रों की मौतें क्यों हो रही हैं?
2017 में एमबीबीएस छात्रा अनन्या दीक्षित की मौत के बाद उनके पिता अनादि दीक्षित ने चेतावनी दी थी”आज मेरी बेटी गई है, कल किसी और की जाएगी।”उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), डीजीपी, मुख्यमंत्री और कई एजेंसियों से शिकायत की, लेकिन हालात नहीं बदले। आज फिर एक छात्र ICU में है और वही सवाल गूंज रहा है-आखिर सिस्टम कब जागेगा?
NHRC ने भी उठाए थे सवाल
अनन्या दीक्षित की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तत्कालीन डीजीपी उत्तर प्रदेश और एसएसपी बरेली को तलब किया था। आयोग ने SRMS में हुई सभी छात्र मौतों की जांच रिपोर्ट मांगी थी। आयोग ने अपने नोटिस में साफ कहा था कि पुलिस और अन्य एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट संतोषजनक नहीं है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (अब NMC) के जवाब पर भी सवाल उठे थे।
मौतों का भयावह रिकॉर्ड
SRMS मेडिकल कॉलेज में वर्षों से हुईं संदिग्ध मौतों का रिकॉर्ड चौंकाने वाला है
18 सितंबर 2002 – योगेश मिश्रा की कथित जहर खाने से मौत
1 जुलाई 2011 – अनिका सिंघल हॉस्टल में फंदे से लटकी मिलीं
27 दिसंबर 2013 – दीपक त्रिपाठी की कथित आत्महत्या
10 जनवरी 2013 – सय्यद हसन मेहदी संदिग्ध हालात में मृत मिले
28 मई 2015 – प्रियंका सिंह हॉस्टल में फंदे से लटकी मिलीं
12 जुलाई 2016 – यश कुमार मृत मिले, जांच में जहर की बात सामने आई
6 सितंबर 2017 – अनन्या दीक्षित हॉस्टल में मृत मिलीं
18 जनवरी 2018 – हर्षित संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए
2 जून 2026 – एमडी छात्र डॉ. आशु ने तीसरी मंजिल से छलांग लगाई, ICU में भर्ती
सवाल जो जवाब मांगते हैं
क्या एक ही संस्थान में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं महज संयोग हैं?क्या रैगिंग विरोधी नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?क्या हर बार जांच के नाम पर सच दबा दिया जाता है?क्या NMC के निरीक्षणों में सब कुछ सामान्य दिखता रहा?और सबसे बड़ा सवाल क्या किसी और छात्र की जान जाने के बाद ही सिस्टम जागेगा? आज ICU में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा एक छात्र सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जो वर्षों से चेतावनियों के बावजूद खामोश दिखाई देती रही है।













