सीएम करेंगे 58 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

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बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित दौरे से पहले जिले में विकास परियोजनाओं की रफ्तार अचानक तेज हो गई है। 511 करोड़ रुपये से अधिक की सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास होने जा रहा है। 113 किलोमीटर लंबी 14 सड़कों का लोकार्पण होगा, जबकि 44 नई सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी। इसके साथ ही वर्षों से शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल कूड़ा निस्तारण के लिए सथरापुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को भी चालू करने की कवायद तेज कर दी गई है। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जिन सड़कों और योजनाओं का शिलान्यास होने जा रहा है, क्या वे तय समय पर धरातल पर उतर पाएंगी? क्योंकि जिले में कई बड़ी परियोजनाएं आज भी अधूरी पड़ी हैं और लोग उनके पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं।

14 सड़कें तैयार, 44 नई परियोजनाओं की शुरुआत
लोक निर्माण विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री 242 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 14 सड़कों का लोकार्पण करेंगे। इनमें नवाबगंज, बहेड़ी, मीरगंज, फरीदपुर और आंवला विधानसभा क्षेत्रों की प्रमुख सड़कें शामिल हैं। नवाबगंज में बीजामऊ-केसरपुर मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण 24.90 करोड़ रुपये से कराया गया है।
वहीं उद्योग लॉजिस्टिक पार्क योजना से जुड़ी सड़क पर भी 2.56 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। आंवला क्षेत्र में भमोरा-शाहाबाद-बिलारी मार्ग का चौड़ीकरण और मजबूतीकरण सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल है, जिस पर करीब 149 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। बहेड़ी और मीरगंज क्षेत्रों में भी कई महत्वपूर्ण सड़कें तैयार हुई हैं।

इसके अलावा 269.63 करोड़ रुपये की लागत वाली 44 नई सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास होगा। इनमें बहेड़ी-वाहपुर-नदेली-भड़िया कॉलोनी मार्ग का दो लेन चौड़ीकरण प्रमुख है, जिस पर 50.62 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

सड़कें बनेंगी तो सफर आसान होगा
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। किसानों, व्यापारियों, छात्रों और आम लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी। खराब सड़कों और जाम की समस्या भी कम होने की उम्मीद है।

कूड़े के पहाड़ से मिलेगी राहत?
सिर्फ सड़कें ही नहीं, मुख्यमंत्री के दौरे से पहले सथरापुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को भी तेजी से तैयार किया जा रहा है। यह परियोजना लंबे समय से चर्चा में है, लेकिन अब मशीनों की स्थापना और तकनीकी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार प्लांट शुरू होने के बाद रोजाना लगभग 500 मीट्रिक टन कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सकेगा। इससे शहर के विभिन्न इलाकों में लगने वाले कूड़े के ढेरों से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

इंदौर मॉडल से सीखने की कोशिश
नगर निगम की टीम देश के स्वच्छ शहरों में शामिल इंदौर और गुजरात के कुछ शहरों के कचरा प्रबंधन मॉडल का अध्ययन कर रही है। उद्देश्य यह है कि बरेली में भी कूड़े के निस्तारण की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जा सके।

पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी का कहना है कि प्लांट शुरू होने के बाद शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। प्रदूषण कम होगा और स्वच्छता रैंकिंग में भी सुधार की संभावना है।

जनता की नजर नतीजों पर
मुख्यमंत्री का दौरा विकास योजनाओं के लिहाज से अहम माना जा रहा है। 511 करोड़ रुपये की परियोजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर उतरती हैं तो जिले की तस्वीर बदल सकती है। लेकिन जनता अब सिर्फ शिलान्यास और लोकार्पण नहीं, बल्कि समय पर काम पूरा होने और उसका लाभ मिलने का इंतजार कर रही है।

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