फ़रमान मियाँ की अपील पर मुल्क ही नहीं, विदेशों में भी अकीदतमंद कर रहे पौधारोपण
अमित नारायण शर्मा/बरेली। 108वें उर्स-ए-रज़वी की रूहानी फ़िज़ाओं के बीच दरगाह आला हज़रत से पर्यावरण संरक्षण का एक ख़ूबसूरत पैगाम बुलंद हुआ। “एक पौधा आला हज़रत के नाम” मुहिम का आगाज़ करते हुए आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ फ़ाज़िले बरेलवी की तालीमात को अमल की शक्ल देने की अपील की गई। इस मुहिम का मक़सद दीन की रौशनी के साथ ज़मीन की हरियाली और इंसानी ज़िम्मेदारी के एहसास को भी मज़बूत करना है।
जमाअत रज़ा-ए-मुस्तफ़ा एवं आला हज़रत ताजुश्शरिया वेलफेयर सोसाइटी के राष्ट्रीय महासचिव फ़रमान हसन ख़ान उर्फ़ फ़रमान मियाँ ने देश-विदेश के उलेमा, इमामों, मदरसों, मस्जिदों और तमाम अकीदतमंदों से अपने-अपने इलाक़ों में पौधे लगाने और उनकी परवरिश का अहद लेने की दरख़्वास्त की। उन्होंने कहा कि बढ़ता प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और घटते जंगल इंसानियत के मुस्तक़बिल के लिए संगीन ख़तरा हैं। अगर हर शख़्स एक पौधा लगाकर उसकी हिफ़ाज़त का ज़िम्मा उठाए, तो आने वाली नस्लों को बेहतर और साफ़-सुथरा माहौल दिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि उर्स-ए-रज़वी के दौरान उलेमा अपनी तक़रीरों में भी पर्यावरण संरक्षण की अहमियत पर रौशनी डालेंगे, ताकि यह पैगाम घर-घर पहुँचे। पूर्व प्रवक्ता समरान ख़ान ने बताया कि फ़रमान मियाँ की अपील का असर अब साफ़ दिखाई देने लगा है। भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ कई विदेशी मुल्कों में भी अकीदतमंद पौधारोपण कर इस मुहिम को कामयाबी की नई बुलंदियों तक पहुँचा रहे हैं। हरियाली का यह कारवाँ अब एक वैश्विक पैगाम बनता नज़र आ रहा है।














