बीडीए में अब फाइल नहीं, सीधे स्टेकहोल्डर्स से होगा संवाद

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बरेली। भवन का नक्शा पास कराने में बार-बार लगने वाली आपत्तियों, तकनीकी अड़चनों और लंबी प्रक्रिया से जूझ रहे लोगों के लिए बरेली विकास प्राधिकरण ने नई पहल की है। अब समस्याओं को सिर्फ कार्यालय की फाइलों तक सीमित रखने के बजाय बीडीए सीधे आर्किटेक्ट, इंजीनियर, बिल्डर, उद्यमी, अस्पताल, स्कूल और होटल संचालकों से संवाद करेगा। इसके लिए प्राधिकरण ने ‘विकास संवाद’ शुरू करने का फैसला लिया है।

मुख्यमंत्री के सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित जनसेवा के विजन के तहत शुरू की जा रही इस पहल का मकसद भवन मानचित्र स्वीकृति और निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल, स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। संवाद में स्टेकहोल्डर्स अपनी व्यावहारिक दिक्कतें और सुझाव सीधे बीडीए अधिकारियों के सामने रख सकेंगे।

छह बैठकों में अलग-अलग वर्गों से होगी बात

विकास संवाद की शुरुआत तीन सितंबर से होगी। पहले चरण में आर्किटेक्ट, इंजीनियर और लाइसेंस प्राप्त तकनीकी प्रोफेशनल्स के साथ बैठक होगी। इसके बाद 10 सितंबर को बिल्डर और डेवलपर, 17 सितंबर को औद्योगिक संघ व उद्योग प्रतिनिधि, 24 सितंबर को मेडिकल एसोसिएशन व अस्पताल प्रतिनिधि, एक अक्तूबर को विद्यालय एवं शैक्षणिक संस्थान और आठ अक्तूबर को होटल एसोसिएशन व होटल उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ संवाद होगा।

बार-बार आपत्ति और स्क्रूटिनी से मिलेगी राहत

बीडीए का जोर इस बात पर रहेगा कि नक्शा दोबारा जमा करने से पहले पिछली स्क्रूटिनी में लगाई गई सभी आपत्तियों का बिंदुवार और पूरा अनुपालन किया जाए। इससे एक ही नक्शे पर बार-बार आपत्ति लगने और कई चक्रों में स्क्रूटिनी होने से होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा।

ऑनलाइन भवन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली और पोर्टल में आने वाली तकनीकी दिक्कतों का भी फीडबैक लिया जाएगा। नियमों और प्रक्रियाओं को और स्पष्ट बनाने के लिए स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लिए जाएंगे।

निवेश और रोजगार को भी मिलेगी रफ्तार

प्राधिकरण का मानना है कि प्रक्रिया आसान होने से भवन निर्माण, निवेश और कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही बरेली के सुनियोजित विकास के लिए उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, होटल और अन्य क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के सुझावों को विकास योजनाओं से जोड़ने पर भी चर्चा होगी।

बीडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि समस्याओं को केवल कार्यालय स्तर पर देखने के बजाय संबंधित पक्षों से सीधे संवाद कर उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना इस पहल का उद्देश्य है। स्टेकहोल्डर्स से मिलने वाले सुझावों के आधार पर मानचित्र स्वीकृति व्यवस्था में जरूरी सुधार किए जाएंगे, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता लाई जा सके।

बीडीए की यह पहल आने वाले समय में प्राधिकरण और तकनीकी प्रोफेशनल्स के बीच बेहतर समन्वय के साथ शहर में निवेश और सुनियोजित विकास को गति देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

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